Thursday, April 15, 2010


मुंबई का एक फोटो

एक फोटो फिल्म अभिनेता हेमंत पाण्डेय के साथ

पुरस्कृत करते मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक
मेरी पुस्तक हृदयांजलि का विमोचन करती महिला सशक्तिकरण मंत्री बीना महराना

Friday, April 2, 2010

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है
ये माना कि महफ़िल जवां है हसीं है
मुझे फिर तबाह कर मुझे फिर रुला जा
सितम करने वाले कहीं से तू आ जा
आखों में तेरी ही सूरत बसी है
तेरी ही तरह तेरा गम भी हंसी है
जिधर भी ये देखे जहाँ भी ये जाएँ
तुझे ढूंढती हैं ये पागल निगाहें
मैं जिन्दा हूँ लेकिन कहाँ जिंदगी है
मेरी जिंदगी तू कहाँ खो गई है

चाँद
के
पार
चलें

Saturday, March 27, 2010


दोस्ती किसी की रियासत नहीं होती
मौत किसी की अमानत नहीं होती
संभलकर रखना कदम हमारी सल्तनत मे
यहाँ दोस्ती तोड़ने वाले की जमानत नहीं होती
करन उप्रेती

Saturday, March 6, 2010


दिल से हरदम न जाने क्यूँ
अंगारे बरसते रहते हैं
मैं आह सी भरता रहता हूँ
आसूं ही टपकते रहते हैं
बेचैनी सी छा जाती है
पल पल जलते रहते हैं
दिल धडकता है फिर भी
मेरे प्राण निकलते रहते हैं

Friday, March 5, 2010


पंख होते तो
मस्ती

बालेश्वर मंदिर

जंगल में मंगल

हर फिक्र को धुंए में उडाता चला गया


वाणासुर किला चम्पावत

Thursday, March 4, 2010

जाने कहाँ गए वो दिन
कहते थे तेरी राह में
नजरों को हम झुकायेंगे
चाहे कहीं भी तुम रहो
तुमको न भूल पाएंगे
अपनी नजर में आजकल
दिन भी अँधेरी रात है
साया ही अपने साथ था
साया ही अपने साथ है

Wednesday, March 3, 2010


जब हमने तुम्हे याद किया है
दिल रोया है मेरा यार
क्यों फिर ये दीवार खड़ी है
जब करते हैं तुमको प्यार
हमने तुमको साथी माना
हमको मिली है सिर्फ जुदाई
महफ़िल में तेरी आकर भी
अपनी किस्मत में तन्हाई