Wednesday, April 28, 2010

जीवन?
एक दर्द, एक चुभन
एक गम कुछ खो जाने का /
जीवन?
एक आस, एक किरण
एक धन कुछ मिल जाने का/
जीवन?
एक सफ़र, एक गमन
एक पथ चलते जाने का/
जीवन?
एक पहेली, अनजान
बिन सोचे जीते जाने का/
जीवन?
एक प्राण, भीष्म प्राण
हँसते-रोते पूरा करते जाने का/
जीवन?
एक संघर्ष, एक युद्ध
खड्ग बिन द्वन्द करते जाने का/
जीवन?
एक भटकन, एक तर्पण
एक भूल भटकते jane का /
जीवन?
एक कहानी, अनकही
बस सुनते जाने का /
जीवन?
एक विश्वास, एक प्यास
अपना और गैर चुनते जाने का/

Tuesday, April 27, 2010


प्यार खुदा है सब कहते हैं,
फिर क्यों प्यार पे पहरे हैं/
प्यार जहाँ में सब करते हैं,
फिर क्यों जख्म ये गहरे हैं//

रंग बिरंगी धरती सारी
रंगीला जग सारा /
सारे जग में सबसे प्यारा,
मेरा भारत न्यारा //

Friday, April 23, 2010

हमने चाहा जबसे तुमको ,
जीना ही दुस्वार हुवा \
दर्द मिले हैं इतने हमको,
अब सोचें क्यों प्यार हुवा \\
खता नहीं कुछ इसमें तुम्हारी,
दुश्मन जो संसार हुआ \
हमने चाहा प्यार बढ़ाना,
नफरत का व्यापार हुआ \\

Monday, April 19, 2010


खुशियों की निशानी फूल नहीं,
कांटे भी कभी खुशियाँ देते हैं
जब जख्म मिले अपनों से हमें,
हम काँटों संग भी जी लेते हैं

Saturday, April 17, 2010


प्यार के इस शहर मे नफरत के बीज किसने बोये,?
जो हंसाता था सभी को आज वह खुद ही क्यों रोये ?

Friday, April 16, 2010


कह रहा प्यार हमसे चलो हम चलें,
उस जहाँ में जहाँ कोई गम न मिले
हम मिलें दिल मिले और खुशियाँ मिले,
उस जहाँ में जहाँ अपनी चाहत फले

nasiruddin shah


ये क्या हो रहा है भइया

आमाँ सठियाय गए हो क्या
हम ही तो हैं

आदाब अर्ज़ है मियां कइसन हैं

Thursday, April 15, 2010


मुंबई का एक फोटो

एक फोटो फिल्म अभिनेता हेमंत पाण्डेय के साथ

पुरस्कृत करते मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक
मेरी पुस्तक हृदयांजलि का विमोचन करती महिला सशक्तिकरण मंत्री बीना महराना

Friday, April 2, 2010

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है
ये माना कि महफ़िल जवां है हसीं है
मुझे फिर तबाह कर मुझे फिर रुला जा
सितम करने वाले कहीं से तू आ जा
आखों में तेरी ही सूरत बसी है
तेरी ही तरह तेरा गम भी हंसी है
जिधर भी ये देखे जहाँ भी ये जाएँ
तुझे ढूंढती हैं ये पागल निगाहें
मैं जिन्दा हूँ लेकिन कहाँ जिंदगी है
मेरी जिंदगी तू कहाँ खो गई है

चाँद
के
पार
चलें

Saturday, March 27, 2010


दोस्ती किसी की रियासत नहीं होती
मौत किसी की अमानत नहीं होती
संभलकर रखना कदम हमारी सल्तनत मे
यहाँ दोस्ती तोड़ने वाले की जमानत नहीं होती
करन उप्रेती

Saturday, March 6, 2010


दिल से हरदम न जाने क्यूँ
अंगारे बरसते रहते हैं
मैं आह सी भरता रहता हूँ
आसूं ही टपकते रहते हैं
बेचैनी सी छा जाती है
पल पल जलते रहते हैं
दिल धडकता है फिर भी
मेरे प्राण निकलते रहते हैं

Friday, March 5, 2010


पंख होते तो