Saturday, April 11, 2009

सूनी पड़ी क्यों बस्तियां

उजड़ रहे क्यों गाँव हैं?

शांतवास त्याग क्यों

शहर की ओर पांव है

हर दिशा से उठ रही

क्यों आज ये आवाज है

रोजगार दो हमें कोई रोजगार दो

भूख प्यास से हमें कोई उबार दो

Sunday, March 29, 2009

आज तो मय छू लेने दो ...


Thursday, March 26, 2009

दोस्त पुराना याद आया

पैसे चार कमाने निकले ,
तब हमको घर याद आया
बूढी माँ की सुखी खांसी ,
जर्जर हाथों का दुलार आया ,
हर पल रहता साथ जो मेरे ,
दोस्त पुराना याद आया
पैसे चार कमाने निकले ....................
गाँव की वो पगडण्डी टेडी ,
पीपल की छाँव याद आई
बात बात पर भिड़ना यारों से ,
चौपाल गाँव की याद आई
जंगल की वो घनी झारियां,
बहती नदियाँ याद आई
पैसे चार कमाने निकले .........................................
जीवन ख़त्म हुआ जब अपना ,
जीने का तब ढंग आया
पहुंचे मौत की खाई मैं जब ,
तब सोचा की क्या पाया
गैरों ने जब ठुकराया हमको ,
अपनों का प्यार याद आया
पैसे चार कमाने निकले ................................................

Saturday, March 21, 2009

शब्दों की महक !

प्यार करिश्मा कैसा यारो ,

हँसना हमें सिखाया है

प्यार हुआ है जब से हमको ,

जीने का ढंग आया है

प्यार नही था जब तक हमको ,

हम तो रूखे रूखे थे

सावन भी आता था लेकिन ,

दिल के तरु सब सूखे थे

दुनिया लगती है अब प्यारी ,

प्यार को जब से पाया है

हर लम्हा उनकी यादों का ,

तोहफा लेकर आया है

कागज़ पर शब्दों की महक ने ,

ऐसा जाल बिछाया है

कि आज मेरा महबूब भी चलकर ,

मेरे दर पर आया है

चाल शराबी होंठ गुलाबी ,

नैनों मैं मदिरा लाया

बातें उसकी रस कि प्याली ,

साथ बहारे वो लाया

जीवन ये खुशियों का सागर ,

अब तो हमको लगता है

तनहा रहकर अब हर लम्हा ,

हमको डंसता रहता है

Friday, January 9, 2009

dil toota hai jab bhi mera
aah uthi hai is dil mai
aahon se upje hain sabd
sabd bane kavita khilke.